आपके पिता या दादा के नाम पर हो सकती है जमीन! पुराने जमीन रिकॉर्ड से ऐसे पता करें अपने हक की संपत्ति

आपके पिता या दादा के नाम पर हो सकती है जमीन! पुराने जमीन रिकॉर्ड से ऐसे पता करें अपने हक की संपत्ति

क्या आपके पिता या दादा के नाम पर पुश्तैनी जमीन थी? जानें UP, MP और बिहार में पुराने जमीन रिकॉर्ड, खसरा, खतौनी और जमाबंदी ऑनलाइन कैसे खोजें।

📅 October 26, 2026 🏷 Finance ⏱ 6 min read

क्या आपके दादा या परदादा के पास कभी गांव में खेत, प्लॉट या पुश्तैनी जमीन थी? अगर परिवार के पास उसके कागजात नहीं हैं, तो भी जरूरी नहीं कि जमीन का रिकॉर्ड मिलना असंभव हो।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन देखे जा सकते हैं। पुराने दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड की मदद से आप पता लगा सकते हैं कि आपके परिवार के नाम पर जमीन दर्ज है या नहीं।

1. सबसे पहले ये 4 जानकारियां जुटाएं

जमीन खोजने के लिए घर के बुजुर्गों से ये जानकारी लें:

अगर खसरा नंबर नहीं पता, तो भी गांव और पुराने मालिक के नाम से खोज शुरू की जा सकती है। हालांकि, हर राज्य के पोर्टल पर नाम से खोजने की सुविधा उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

2. अपने राज्य के सरकारी पोर्टल पर जमीन खोजें

इन आधिकारिक पोर्टल पर जमीन के रिकॉर्ड देख सकते हैं:

उत्तर प्रदेश: UP Bhulekh

यहां संबंधित जिला, तहसील और गांव चुनकर खतौनी या उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड देखें।

मध्य प्रदेश: MP Bhulekh

यहां खसरा और अन्य उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड की जानकारी खोजें।

बिहार: Bihar Bhumi

यहां ऑनलाइन जमाबंदी और राजस्व रिकॉर्ड देखने की सुविधा उपलब्ध है। जिला, अंचल और मौजा चुनकर पुराने मालिक से जुड़ी जानकारी तलाश सकते हैं।

अन्य राज्यों के आधिकारिक पोर्टल खोजने के लिए भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग की वेबसाइट देखें। <Cite refs={["turn721111search0","turn721111search2","turn721111search13"]}/>

3. रिकॉर्ड में नाम मिल जाए तो आगे क्या करें?

अगर आपको अपने पिता या दादा के नाम पर जमीन का रिकॉर्ड मिलता है, तो सिर्फ ऑनलाइन नाम देखकर यह न मानें कि जमीन पर आपका कानूनी अधिकार साबित हो गया है।

आगे ये कदम उठाएं:

  1. रिकॉर्ड की कॉपी लें: खसरा, खतौनी या जमाबंदी का विवरण सुरक्षित रखें।
  2. पुराने दस्तावेज जांचें: रजिस्ट्री, विरासत के कागजात, बंटवारे के दस्तावेज और उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड मिलाएं।
  3. मौजूदा स्थिति पता करें: संबंधित तहसील या राजस्व कार्यालय में जांचें कि जमीन अभी किसके नाम दर्ज है और कोई नामांतरण, बंटवारा या विवाद तो नहीं है।
  4. जरूरत पड़ने पर प्रमाणित कॉपी लें: कानूनी प्रक्रिया के लिए संबंधित विभाग से प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त करें।

4. अगर जमीन दादा के नाम पर है, तो क्या पोते को हिस्सा मिलेगा?

यह परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि जमीन पैतृक है या दादा ने खुद खरीदी थी, उनकी मृत्यु के समय कौन-कौन कानूनी वारिस थे, कोई वसीयत या वैध बंटवारा हुआ था या नहीं, और कौन-सा कानून लागू होता है।

इसलिए दादा के नाम पर जमीन दर्ज होने से हर पोते को अपने-आप बराबर हिस्सा नहीं मिल जाता। यदि जमीन पर किसी दूसरे का दावा है या रिकॉर्ड में गड़बड़ी है, तो स्थानीय राजस्व अधिकारी या संपत्ति कानून के वकील से सलाह लें।

5. ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं मिले तो क्या करें?

पुरानी जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध न हो, तो संबंधित तहसील, पटवारी या लेखपाल कार्यालय और जिला अभिलेखागार में पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बारे में पूछें। पुराने खाता नंबर, गांव के नाम में बदलाव या रिकॉर्ड के डिजिटाइज न होने के कारण ऑनलाइन खोज में जानकारी छूट सकती है।

एक जरूरी सावधानी: जमीन खोजने या नाम चढ़वाने के नाम पर किसी अनजान एजेंट को पैसे न दें। सरकारी पोर्टल और संबंधित राजस्व कार्यालय से प्रक्रिया की पुष्टि करें।

आज ही ये काम करें

घर के बुजुर्गों से गांव और पुराने जमीन मालिक का नाम पूछें। फिर संबंधित राज्य के आधिकारिक पोर्टल पर रिकॉर्ड खोजें। कोई रिकॉर्ड मिल जाए, तो उसकी वर्तमान स्थिति और कानूनी दस्तावेजों की पुष्टि जरूर करें। इससे आपको पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परिवार की पुरानी जमीन का कोई रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। भूमि रिकॉर्ड और विरासत के नियम राज्य तथा मामले के अनुसार अलग हो सकते हैं।